आखिर क्यों मनाई जाती है रंगों की होली और लोग क्यों उड़ाते है गुलाल

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celebrated by throwing colors? न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। कई सिद्ध साधक इस दिन देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए प्राचीन प्रामाणिक विधि से पूजन पाठ करते हैं। इस दिन आसुरी शक्तियों का नाश हुआ था

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1 जाने होली का इतिहास :

हिरण्यकश्यप प्राचीन भारत(India) का एक राजा था जो कि राक्षस की तरह था। वह अपने छोटे भाई की मौत का बदला लेना चाहता था जिसे भगवान विष्णु ने मारा था। इसलिए ताकत पाने के लिए उसने सालों तक प्रार्थना की। आखिरकार उसे वरदान मिला। लेकिन इससे

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हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझने लगा और सभी लोगों को भगवान की तरह पूजा करने को बोलने लगा इस दुष्ट राजा का एक बेटा था जिसका नाम प्रहलाद था और वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। प्रहलाद ने अपने पिता का कहना कभी नहीं माना और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। बेटे द्वारा अपनी पूजा ना करने से नाराज उस राजा ने अपने बेटे को मारने का फैसला किया हिरण्यकश्यप(Hiranyakashipu)होलिका को कहा कि वो प्रहलाद को गोदी में लेकर आग में बैठ जाए क्योंकि होलिका आग में जल नहीं सकती थी। उनकी योजना प्रहलाद को जलाने की थी, लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हो सकी क्योंकि प्रहलाद सारा समय भगवान

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विष्णु का नाम लेता रहा और बच गया पर होलिका जलकर राख हो गई। होलिका की ये पराजय,बुराई को ख़तम होने का प्रतीक है। इसके बाद भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया, लेकिन होली से होलिका की मौत की कहानी जुड़ी है। इसके चलते भारत के कुछ राज्यों में होली से एक दिन पहले बुराई के अंत के प्रतीक के तौर पर होली जलाई जाती है

2 होली मे रंगो का महत्व :

पहले होली के रंग टेसू या पलाश के फूलों से बनते थे और उन्हें गुलाल कहा जाता था। वो रंग त्वचा के लिए बहुत अच्छे होते थे क्योंकि

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उनमें कोई रसायन नहीं होता था। लेकिन समय के साथ रंगों की परिभाषा बदलती गई। आज के समय में लोग रंग के नाम पर कठोर रसायन का उपयोग करते हैं। इन खराब रंगों के चलते ही कई लोगों ने होली खेलना छोड़ दिया है। हमें इस पुराने त्यौहार को इसके सच्चे स्वरुप में ही मनाना चाहिए

3 होली के समारोह की मन भावन बातें :

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होली एक दिन का त्यौहार नहीं है। कई राज्यों में यह त्यौहार तीन दिन तक भी मनाया जाता है 1 पूर्णिमा के दिन 1थाली में रंगों को सजाया जाता है और परिवार का सबसे बड़ा सदस्य बाकी सदस्यों पर रंग छिड़कता है 2 इसे पूनो भी कहते हैं। इस दिन होलिका के चित्र

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जलाते हैं और होलिका और प्रहलाद की याद में होली जलाई जाती है। अग्नि देवता के आशीर्वाद के लिए मांएं अपने बच्चों के साथ जलती हुई होली के पांच चक्कर लगाती हैं 3 इस दिन को ‘पर्व’ कहते हैं और यह होली उत्सव का अंतिम दिन होता है। इस दिन एक दूसरे पर रंग

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और पानी डाला जाता है। भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियों पर भी रंग डालकर उनकी पूजा की जाती है

4 इस समय करे पूजा होगी सभी मनोकामनाएं पूरी

होलिका दहन 1st मार्च 2018 गुरूवार,
रंगवाली होली धुलंडी 2stमार्च 2018 (शुक्रवार)
आप सभी को हमारी तरफ से होली की हार्दिक शुभकामनाये (हैप्पी होली ) 

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What is the Color Festival: Holi and why is it celebrated by throwing colors?

2 thoughts on “आखिर क्यों मनाई जाती है रंगों की होली और लोग क्यों उड़ाते है गुलाल

  1. This post defines the value and reason of our holi festival. Great and deeply expressed details of holi. Beautifully written .keep updating such knowledge gaining posts for our cultural and traditional functions and festivals.

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