अगले हफ्ते हो सकता है पृथ्वी का खात्मा, इस चाइनीज़ चीज़ की वजह से हो सकता है ऐसा


अगले हफ्ते हो सकता है पृथ्वी का खात्मा, इस चाइनीज़ चीज़ की वजह से हो सकता है ऐसा

1.सितंबर 2016 के बाद से तियानगॉन्ग-1 (Tiangong-1) अंतरिक्ष यान नियंत्रण से बाहर
2.ईएसए(ESA) ने भविष्यवाणी की है कि यह अगले हफ्ते की शुरुआत में पुन: धरती के वातावरण में प्रवेश करेगा
3.स्पेन, इटली, तुर्की, भारत और सऊदी अरब खतरे में ये देश

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शोध में पता लगा है कि चीन का पहला स्पेस स्टेशन तियानगॉन्ग-1 (Tiangong-1) 30 मार्च से 6 अप्रैल के बीच धरती से टकरा सकता है। लेकिन वैज्ञानिक अनुमान नहीं लगा सकते हैं कि यह 8.5 टन का मॉड्यूल धरती के किस हिस्से को और कैसे प्रभावित करेगा।

अमेरिका द्वारा वित्त पोषित एयरोस्पेस कॉरपोरेशन का अनुमान है कि मार्च के अंतिम या अप्रैल के पहले सप्ताह के दौरान तियानगॉन्ग-1 (Tiangong-1) धरती के वातावरण में प्रवेश कर सकता है।

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चीन ने 2016 में इस पर नियंतरण खो दिया था

सन 2016 में चीन ने स्वीकार किया था कि उसने तियांगोंग -1 का नियंत्रण खो दिया था और वह उस पर दुबारा नियंतरण नहीं कर सकता है।
रिपोर्ट में एक नक्शा(Map) शामिल है जिसमें मॉड्यूल 43 ° उत्तर और 43 ° दक्षिण अक्षांश के बीच इसके फिर से धरती पर गिरने की संभावना है। उत्तर चीन, मध्य पूर्व, मध्य इटली, उत्तरी स्पेन और अमेरिका, न्यूजीलैंड, तस्मानिया(Tasmaniya), दक्षिण अमेरिका के हिस्सों और दक्षिणी अफ्रीका के उत्तरी राज्यों में गिरने की संभावना अधिक है।

मैकडोवेल ने कहा कि हालिया महीनों में तियांगोंग-1 धरती की और बढ़ रहा था और अक्टूबर में 1.5 किमी की तुलना में यह अब सप्ताह के लगभग 6 किलोमीटर तक स्पीड से गिर रहा था।

आखिर Tiangong-1 किस तरह से मचा सकता है पृथ्वी पर तबाही

एयरोस्पेस ने चेतावनी दी थी कि अंतरिक्ष स्टेशन बोर्ड पर हाइड्राज़िन नामक एक अत्यधिक विषैले और संक्षारक ईंधन स्तित है। साढ़े आठ टन वजनी इस स्पेस स्टेशन पर चीन ने साल 2016 में ही अपना नियंत्रण(control) खो दिया था और तब से ही यह धरती की तरफ लगातार तेज़ गति से बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस स्पेसक्राफ्ट का अधिकतर हिस्सा गिरते समय जलकर खाक हो जाएगा लेकिन 10 से 40 % हिस्सा मलबे के रूप में बचा रह सकता है और इसमें खतरनाक केमिकल्स हो सकते हैं। जो की धरती पर जहा भी यह तियानगॉन्ग-1 (Tiangong-1) स्पेस स्टेशन गिरेगा उस क्षेत्र के लिए घातक साबित हो सकता है।

क्या है तियानगॉन्ग-1 (Tiangong-1)

2011 में Tiangong-1 या स्वर्गीय पैलेस प्रयोगशाला शुरू की गई और चीन के “शक्तिशाली राजनीतिक प्रतीक” के रूप में इसे प्रक्षेपित किया गया था यह एक अंतरिक्ष महाशक्ति बनने के लिए एक वैज्ञानिक कदम था।

यह मनुष्य और मानव रहित दोनों मिशनों के लिए इस्तेमाल किया गया था और चीन की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री, लियू यांग, 2012 में इसमें आई थी।

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