आज़ाद हिंद फौज के महानायक सुभाष चंद्र बोस की जयंती, PM मोदी ने किया नमन

PM Modi Subhash Chandra Bose Birth Anniversary

PM Modi Subhash Chandra Bose Birth Anniversary

PM Modi Subhash Chandra Bose Birth Anniversary, आज़ाद हिंद फौज के महानायक सुभाष चंद्र बोस की जयंती, PM मोदी ने किया नमन

नेताजी सुभाषचंद्र बोस : परिचय एक नजर में 

स्वंत्रता सेनानायक और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस

की जयंती 23 जनवरी को धूमधाम से मनाई जा  रही है।

इसी दिन में डीएवी पब्लिक स्कूल में तिरंगा सम्मान यात्रा निकाल रहा है।

इस संबंध में आवश्यक तैयारियां की गई है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के समान कोई दूसरा व्यक्तित्व वाला नहीं हुआ,

वे एक महान सेनापति,  वीर पुरुष सैनिक, राजनीति के बेहद अद्भुत खिलाड़ी और

अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नेताओं के समकक्ष बैठकर कूटनीति या चर्चा करने

वाले इस विलक्षण व्यक्तित्व के बारे में जितना भी बताया जाए वह कम है।

आइए जानते है स्वाधीनता भारत में महासंग्राम के

महायज्ञ में बेहद अहम भूमिका निभाने वाले नेताजी के बारे में जानकारी :-

 

1897  : ‘नेताजी’ सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को जानकी ‘नाथ बोस और श्रीमती प्रभावती’ देवी के यहाँ पर हुआ था।

 

1913 :  उन्होंने 1913 में अपनी कॉलेज की शिक्षा आरम्भ की और कलकत्ता की प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया।

1915 : सन् 1915 में नेताजी ने इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण (पास) की।

 

1916 :  में बोस को एक ब्रिटिश प्रोफेसर के साथ दुर्व्यरवहार के आरोप में निलंबित किया गया।

 

1917 :  सुभाष चंद्र बोस ने 1917 में स्कॉयटिश चर्च कॉलेज में फिलॉसफी ऑनर्स में दाखिला लिया।

 

1919 :  फिलॉसफी ऑनर्स में नेताजी ने प्रथम स्थान अर्जित करने के

साथ ही आईसीएस परीक्षा देने के लिए इंग्लैंड के लिय रवाना हो गए।

1920 :  सुभाषन चंद्र बोस ने अंग्रेजी में सबसे ज्यादा अंक के साथ

आईसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की, और चौथा स्थान भी प्राप्त किया।

1920 : में नेताजी को कैंब्रिज विश्वेविद्यालय की प्रतिष्ठित डिग्री प्राप्त हुई।

1921 :  नेताजी को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया।

1922 :  1 अगस्त, 1922 को नेताजी जेल से बाहर आए और ‘देशबंधु’ चितरंजन दास

की अगुवाई में गया कांग्रेस अधिवेशन में स्व‍राज दल में शामिल भी हो गए।

1923 : सन् 1923 में वे भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए।

इसके साथ-साथ ही बंगाल कांग्रेस के सचिव भी चुने गए।

उन्होंने ‘देशबंधु’ की स्थापित पत्रिका ‘फॉरवर्ड’  का संपादन करना स्टार्ट किया।

1924 : इसी दौरान स्वराज दल को कलकत्ता म्युकनिसिपल चुनाव में भारी सफलता मिली।

‘देशबंधु’ मेयर बने और नेताजी ‘सुभाषचंद्र बोस’ को मुख्यव कार्यकारी

अधिकारी के तौर पर मनोनीत किया गया।

सुभाष चन्द्र जी के बढ़ते हुये प्रभाव को देखकर अंग्रेज सरकार

बरदाश्त नहीं कर सकी और अक्टूबर में ब्रिटिश सरकार ने एक बार फिर से नेताजी को गिरफ्तार कर लिया।

1925 :  “देशबंधु” का निधन हो गया।

1927 :  नेताजी सुभाषचंद्र बोस,  जवाहर लाल नेहरू के साथ

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सामान्य सचिव चुने गए।

1928 : स्वातंत्रता आंदोलन को धार देने के लिए नेताजी ने

भारतीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन के समय स्वैशच्छिक संगठन की स्थापन किया।

नेताजी सुभाष चन्द्र इस संगठन के जनरल ऑफिसर-इन-कमांड चुने गए।

1930 : नेताजी को जेल भेज दिया गया। जेल में रहने के दौरान ही

उन्होंने कलकत्ता के मेयर का चुनाव भी जीता।

1931 :  23 मार्च,  1931 को शहीद भगतसिंह को फांसी दे दी गई,

जो कि नेताजी सुभाषचंद्र और महात्मां गांधी में मतभेदो का कारण बनी।

1932-1936 : नेताजी सुभाषचंद्र ने भारत की आजादी के लिए विदेशी

राजनेताओं से दबाव डलवाने के लिए इटली में मुसोलिनी,  जर्मनी में फेल्डरर,

आयरलैंड में वालेरा और फ्रांस में रोमा रोनांड से जाकर मुलाकात की।

1936 :  13 अप्रैल,  1936 को भारत आने पर उन्हें मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया।

1936-37 :  रिहा होने के बाद उन्होंने यूरोप में ‘इंडियन स्ट्र गल’  का प्रकाशित करना शुरू किया।

1938 :  हरिपुर अधिवेशन में कांग्रेस के अध्य‍क्ष पर चुना गया।

इस बीच शांति निकेतन में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें  सम्मािनित भी किया।

1939 : महात्मा गांधी के उम्मीदवार सीतारमैया को हराकर

एक बार फिर से नेताजी कांग्रेस के अध्यक्ष बने।

बाद में उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।

1940 : नेताजी को नजरबंद कर दिया गया।

इस बीच उपवास के कारण उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ा।

1941 :  एक नाटकीय घटनाक्रम में वे 7 जनवरी, 1941 को अचानक गायब हो गए

और अफगानिस्ता और रूस होते हुए जर्मनी में पहुंचे।

1941 :  9 अप्रैल,  1941 को उन्होंने जर्मन में जाकर

जर्मन सरकार को एक मेमोरेंडम सौंपा जिसमें एक्सिसस पॉवर और

हिन्दुस्थान के बीच परस्पपर सहयोग को संदर्भित किया गया था।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने इसी वर्ष नवंबर में स्वततंत्र भारत केंद्र और स्वगतंत्र भारत रेडियो की भी स्थापना की।

1943 :  नेताजी नौसेना की मदद से जापान पहुंचे और वहां

जाकर उन्होंने टोकियो रेडियो से भारत वासियों को संबोधित किया।

21 अक्टूबर, 1943 को नेताजी ने आजाद हिन्द सरकार की स्थापना की

और इसकी स्थांपना अंडमान और निकोबार दीप में की गई,

जहां पर इसका ‘शहीद और स्वराज’  नाम रखा गया।

 

1944 : आजाद हिन्द फौज अराकान पहुंची और इम्फाल के पास में जंग छिड़ी।

फौज ने कोहिमा (इम्फाल) को अपने कब्जे में किया।

1945 :  दूसरे विश्वीयुद्ध में जापान पर परमाणु हमले के बाद हथियार डाल दिए।

और इसके कुछ दिनों बाद ही नेताजी की हवाई दुर्घटना में मारे जाने की खबर फ़ैल गई।

हालांकि इस बारे में कोई प्रत्याक्ष प्रमाण नहीं भी प्राप्त नही हुए।

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