भारत सरकार द्धारा देश की शिक्षा व्यवस्था में इस तरह सुधार कर रहे है जावेडकर


भारत सरकार द्धारा देश की शिक्षा व्यवस्था में इस तरह सुधार कर रहे है विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर

शिक्षा क्षेत्र में बढती हुई फीस को देखते हुए भारत सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तिन करने का निर्णय लिया है| सरकार का मानना है की शिक्षा स्तर को व्यसायीकरण कर दिया है जैसे प्राइवेट स्कूलों में महंगी किताबे बेचना , शिक्षको का स्तर ठीक न रखना जैसे तमाम हथकंडे अपनाने से शिक्षा न सिर्फ व्यापर में बदल रही है शिक्षा स्तर भी बत्तर होता जा रहा है |मानव विकास मंत्रालय ने शिक्षा के इस क्षेत्र में व्यवसायीकरण को काबू में करने के लिए कई विकल्पों को लागू करने का फैसला कर लिया जो सीबीएसई से संबंदित स्कूलों में शिकंजा होगा |

 विकल्प कुछ इस प्रकार है

(1) 10 बोर्ड परीक्षा फिर से शुरू :- मानव विकास मंत्रालय ने सन 2018 से दसवी बोर्ड परिक्षायो को फिर से शुरू करने का फैसला लिया है साथ ही 5 वी और 8 वी में नो डिटेंशन नीति भी लागू कर दी | छात्रों में प्रतियोगिता की भावना बनाए रखने के लिए सरकार ने बोर्ड की परीक्षा फिर से शुरू करने का फैसला लिया है । जहां तक 5वीं और 8वीं की नो डिटेंशन नीति समाप्त करने का सवाल था, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने फैसला राज्यों पर ही छोड़ा है। सूत्र बताते हैं सिर्फ तीन राज्य हैं जो इस नीति के तहत परीक्षा लेने के तैयार नहीं हैं। ये राज्य तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना है। बाकी सभी राज्यों ने इस नो डिटेंशन पॉलिसी को समाप्त करने का फैसला ले लिया है।

(2)शिक्षकों के स्तर में सुधार की कोशिश :-सरकार ने तमाम बीएड कॉलेजोओ को नोटिस भेजा है और तमाम आंकड़े भेजने को कहा है कि भाविष्य में शिक्षको को कैसी डिग्री वे ट्रेनिंग दी जा रही है मानव विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश भर में कुल 15000 पंजीकृत बीएड कॉलेज हैं। इनमें से 3000 ने अफीडेविट भेज भी दी है।

शिक्षा व्यवस्ता को अच्छा बनाने के लिए तमाम योजनाओ पर काम किया जा रहा है साथ है इस योजनायो का परिणाम भी सामने आ रहा है जिससे देश की शिक्षा व्यवस्था में अच्छे परिवतन आरहे है | मंत्रालय इसी कोशिश में है की धीरे धीरे तमाम योजनाओ को जल्दी अंजाम दिया जाये जिससे न सिर्फ छात्रों को अपितु अभिभावकों को भी सहूलियत मिल सके |

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